chhatisghariya

आप मन सुनथव कार्यक्रम गाँव के संगवारी......... अऊ आप सबो झन तो जानतेच हव के ये कार्यक्रम कईसन कार्यक्रम रथे- ये हमर कार्यक्रम जेन हे ये ऐसन कार्यक्रम आय जेन में अपन छत्तीसगढ़ी आज के ये कार्यक्रम मा आप मन ला सुनाबो

Friday, 19 August 2022

सोंच _एक विचार / नवनीत चंद्रवंशी

सभी की सोच अलग-अलग होती है। कोई अच्छा सोचता है तो कोई बुरा और कई ऐसे भी होते है जो अच्छा और बुरा दोनों सोचते है।  सोचने की प्रकिया को हम अन्तः मनन क्रिया भी कहते हैं, जो मन में होती है।  कहा जाता है न... की मन के हारे हार है, और मन के जीते जीत।  एक बार ठान लिया कि ये करना है तो करना है,  चाहे कुछ भी हो जाए और ज़िंदगी में मुसीबतें तो आती ही रहती है इनसे क्या डरना, क्या घबराना।  डरने घबराने के बजाय मन में एक ढृढ़ संकल्प कीजिये कि मैं इन छोटी छोटी मुसीबतों से घबराकर हार मानने वाला नहीं।  मेरा जन्म ऐसे ही हारने के लिए नहीं हुआ है बल्कि इन चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए हुआ है ताकि मैं आगे बढ़ सकूँ, बढ़ता रहूँ अपनी मंज़िल की ओर । .. जिससे मंज़िल पाना आसान हो जाए .. और ऐसा लगे कि दुनिया मेरे कदमों में है। 

ऐसा मैं सोचता हूँ की पारिवारिक सम्बन्ध हो , प्यार हो चाहे दोस्ती या कोई भी संबंध हो , बिना विश्वास के कोई मतलब ही नहीं है कि कोई भी संबध निभाया जाए।  ये जितने भी संबंध होते हैं , बने या बन जाते हैं ये सभी विश्वास पर टिके होते हैं।  इसलिए अगर आप  कोई भी रिश्ता बनाये रखना चाहते हैं तो ज़रूरी है कि विश्वास कीजिये, विश्वास  नहीं कर  पाते हैं तो सीखिए क्योंकि विश्वास ही हर रिश्ते की नींव होती है। 

विश्वास टूटने के दो ही कारण होते हैं - १ शक  २ गलतफहमी।  ये दो  ऐसी मनःस्थिति है जो किसी भी रिश्ते में दरार डालने के लिए काफी है इसे जितनी जल्दी हो सके दूर  कर लेना चाहिए।

ना जाने क्यूँ उदास हूँ / नवनीत चंद्रवंशी

ना जाने क्यूँ उदास हूँ, 
नहीं पता किस से नाराज़ हूँ ।
ज़िंदगी बेज़ान लगने लगी है, 
आवाज़ नहीं, वो टूटा साज़ हूँ ।
ना जाने क्यूँ उदास हूँ...!!

ज़िन्दगी आज़माती है, 
तो सीखाती भी है ।
उठाती है, तो गिराती भी है ।
गिरा तो मैं भी इन राहों में,
इनसे कहाँ आज़ाद हूँ ।
ना जाने क्यूँ उदास हूँ...!!

सपना रे सपना रे सपना / बालकुमार पटेल

सपना रे सपना रे सपना मोरे सपना ...२ 
मोला तैं बना लेना ... २ गोरी अपना 
सपना रे सपना रे सपना मोरे सपना ...२ 

मया के छावरी में मोला  रख लेबे वो ......२ 
सपना में आके तैंहा राजा कही देबे वो .... २ 
मने मन करथंव गोरी ....२  तोरे कल्पना 
सपना रे सपना रे सपना मोरे सपना ...२ 

तोला मैंहा काहत हावंव करथों तोर से प्यार रे ... २ 
गहरा मोला प्यार होगे झन करबे इनकार रे .... २ 
तैं मोर सजनी गोरी ..... २ मैं तोरे सजना 
सपना रे सपना रे सपना मोरे सपना ...२ 

हरदी के  रंग मा गोरी तोला वो  रंगाहूँ ..२ 
सोना चाँदी मा तोरे तने ला सजाहूँ  .... २ 
डोली सजाके तोला ...... २  लाहूँ मोरे अंगना 
सपना रे सपना रे सपना मोरे सपना ...२ 

- बालकुमार पटेल 

मोर गाँव के तीर बोहाथे / छेदूराम चंद्रवंशी

मोर गाँव के तीर बोहाथे भईया
जोंक नदी के पानी ... 2
लाखों जीव के प्यास बुझाथे ..2
देके अमृत पानी .... 
मोर गाँव के .........

माता असन हमला संगी
कोरा मा खेलाथे गा ... 2
बघुवा बरोबर नांदत चलथे
ऐकर जवानी आथे गा .... 2
मगन होके गावत रइथे...... 2
आथे बरखा रानी ......
मोर गाँव के ..............

मोर गाँव के एक छोड़
नईये कोनो साधन जी ...2
अपन सब निस्तारी ला हम
इही मा निपटाथन जी ...2
परसादे येकरे बितायेन ...2 
खुशी मा जिनगानी ......
मोर गाँव के ........

पानी सबके जीवन संगी
झन करव मैला गोबर जी ...2
छोटे बड़े ऊंच नीच 
ये देखे एके बरोबर जी ....2 
सुमत के ये बात बताथे ....2
देके बिन बोले मीठ बानी ....
मोर गाँव के ......

- छेदूराम चन्द्रवंशी

झूमर जा रे झूमर जा रे /। उदेलाल चंद्रवंशी

दोनो - झूमर जा रे झूमर जा रे झूमर जा रे ....2
का - नाच पतरेंगी रे बाजत हे मोर मांदर धिनक तिना ..2
दोनो - झूमर जा रे झूमर जा रे झूमर जा रे ....
का - आगे बसन्ती घुड़ उड़े, अंग अंग ला छूये .....2
की - अंग अंग ला छूये .....2
की - खार खार मा सेमहर परसा, बखरी मोंगरा फूले ... 2
का - बखरी मोंगरा फूले ... 2
की - अब जीना नइये बइहा तोर बिना 
कोरस - धिनक तिना ......... 4
का - नाच पतरेंगी रे......

का - बर बिहाव के दिन आगे, सुग्घर फगवा लागे ... 2
की - सुग्घर फगवा लागे ... 2
की - आगे रे फागुन महीना 
कोरस - धिनक तिना ......... 4
का - नाच पतरेंगी रे......

का - खाँद खाँद मा जोर के, संग मया के जोड़ ले .. 2
की - संग मया के जोड़ ले .. 2
का - अब जीना नइये गोरी तोर बिना 
कोरस - धिनक तिना ......... 4
का - नाच पतरेंगी रे......

- उदेराम चन्द्रवंशी

मन मोर झूमे रे / नवनीत चंद्रवंशी

मन मोर झूमे रे, तन मोर नाचे रे । 
मन मोर होगे मगन, हाय रे
संग तोर लागे हे लगन ।। 
(संगे संग झुमथे गगन)

मन मोर होथे तोला, बइहाँ म झुलातेंव मैंय ।
नानकुन लइका असन, गोदी म सुलातेंव मैंय ।।
तैंय मोर मया हावस, मैंहा तोर मयारू अंव,
तैंय मोर मन के देवी, मैंहा तोर पुजारी अंव ।।

जिनगी म आजा रे, मन म समाजा रे । 
बनके मोर सनम... हाय रे...
संग तोर लागे हे लगन । 
(संगे संग झुमथे गगन)

सपना म देखेंव तोला, दिन म अऊ राती म,
नदिया के तीर गोरी, आबे तैंय संझाती न ।
जादू भरे हे तोर,मृगनयनी आँखी म,
उड़ जाबो हम दुनो, लगा के पाँखी न ।।
मोर तीर आना रे, सिरतों बताना रे । 
मन तोरो हावे का मगन... हाय रे...
संग तोर लागे हे लगन....
(संगे संग झुमथे गगन)

मन मोर झूमे रे, तन मोर नाचे रे । 
मन मोर होगे मगन, हाय रे
संग तोर लागे हे लगन ।। 
(संगे संग झुमथे गगन)

_ नवनीत चन्द्रवंशी 'नव'

मोला बनाये दीवाना रे / बालकुमार पटेल

मोला बनाये दीवाना रे, दीवाना रे 
तोरेच नइये ठिकाना ------- २ 
तोरेच नइये ठिकाना रे----- २ 
मोला बनाये--------------

तोला देखेंव बस स्टेशन म,
मैंहर भुलागेंव तोर फेशन म.... २ 
देखते देखत गाड़ी छूटगे वो ,
कभु नई आये लहुट के वो। .....२ 
मोला बनाये--------------

खड़े रेहे पान ठेला म,
मोला बलाये अकेला म ....२ 
मोला समझ नई तो पाये वो ,
काये तेला नई बताये वो। ...२ 
मोला बनाये--------------

जवानी हावय मज़ा के चीज़,
गाल गुलाबी देना किस। ...२ 
मोर तीर में टुरी आना रे ,
जाबे की नहीं बताना रे। ...२ 
मोला बनाये--------------

- बालकुमार पटेल